Meeting:कुशीनगर को बौद्ध विहार परिक्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए डीएम के निर्देश
Meeting: जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कुशीनगर परिक्षेत्र को बौद्ध विहार परिक्षेत्र के रूप में माइक्रोप्लान के तहत सुनियोजित ढंग से विकसित करने के निर्देश दिए।
कसाडा बोर्ड और विनियमित क्षेत्र पडरौना के सदस्यों के साथ देर शाम हुई बैठक में डीएम ने पर्यटन की दृष्टि से क्षेत्र के बहुआयामी विकास पर जोर दिया।
बैठक में पडरौना विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत शामिल गांवों, उनके विकास, आधारभूत मानचित्र, शुल्कों में परिवर्तन, दाखिल और स्वीकृत भवन मानचित्रों की स्थिति पर चर्चा हुई।
एसडीएम सदर ने बताया कि 2024-25 में 342 भवन मानचित्र दाखिल हुए, जिनमें 321 स्वीकृत, 13 निरस्त, और 8 अवशेष हैं।
छह भवनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। डीएम ने कम नोटिस जारी होने पर नाराजगी जताई और कहा कि जिन भवनों का नक्शा पास हो सकता था,
लेकिन नहीं कराया गया, उनके खिलाफ नोटिस या अन्य कार्रवाई होनी चाहिए।
कुशीनगर विशेष क्षेत्र महायोजना 2041 और पडरौना विनियमित क्षेत्र 2031 व 2041 पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
डीएम ने कहा कि कसाडा का गठन जनपद में विकास कार्यों को धरातल पर उतारने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हुआ है।
उन्होंने जोर दिया कि कुशीनगर को ऐसा पर्यटक स्थल बनाया जाए, जहां पर्यटक अधिक समय तक रुकें और विभिन्न स्थानों को एक्सप्लोर करें।
डीएम ने आवासीय और व्यवसायिक भवनों के लिए नक्शा प्रोसेसिंग शुल्क, विकास शुल्क, और अनुज्ञा शुल्क की जानकारी ली।
साथ ही, जनवरी 2024 से 25 मई 2025 तक प्राप्त और अवशेष मानचित्रों का विवरण लिया। ई-कार्ट चालक, कम्प्यूटर ऑपरेटर भर्ती और अन्य विकास कार्यों के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।
बैठक में सीडीओ गुंजन द्विवेदी, एडीएम वैभव मिश्रा, एसडीएम व्यास नारायण उमराव, कसाडा के जेई, कनिष्ठ लिपिक सहायक, और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु:
- कुशीनगर को बौद्ध विहार परिक्षेत्र के रूप में विकसित करने पर जोर।
- पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुनियोजित विकास कार्य।
- भवन मानचित्रों की स्वीकृति और नोटिस प्रक्रिया में सख्ती के निर्देश।
- कसाडा के माध्यम से विकास कार्यों को गति देने की योजना।
