Damaged dam:छितौनी बांध हुआ जर्जर, पानी के हल्की बहाव में ठोकर भी बहे
damaged dam: खड्डा कुशीनगर के गांवो की सुरक्षा के लिए वर्ष 1968 से 1973 तक बने छितौनी बांध की हालत
रैंप का निर्माण नहीं होने और बंधे पर मरम्मत नहीं होने से जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चला है।
इस क्षतिग्रस्त बांध को बचाने के लिए बनाए गए ठोकर विभाग और ठेकेदारों के कमाई का जरिया बन गए हैं।
बाढ़ की कटान अभी शुरू भी नहीं हो पाया कि हनुमानगंज गांव के समीप बने किलोमीटर 9.752 पर इस वर्ष वनाये गये
नवनिर्मित ठोकर ठीक ढंग से नहीं बनाने के कारण डाउनस्ट्रीम में 20 मीटर पानी में लांच कर गया साथ ही
ठोकर नंबर 3 के समीप 1973 की बने सीसी ब्लॉक जो नदी की धारा को डाइवर्ट करने का कार्य करते थे।
वह भी लांच करने लगे हैं जिससे इस वर्ष आने वाली बाढ़ से छितौनी बांध
को बचाना बाढ़ खंड के लिए एक गंभीर समस्या उत्पन्न करेगा।
बताते चलें कि क्षेत्रीय ग्रामीणों को बचाने के लिए वर्ष 1968 से लगाए 1973 तक छितौनी बांध सहित ठोकरों का
निर्माण करा कर नारायणी नदी की धारा के वेग को सरकार ने कम कर बाढ़ के खतरे को काफी कम कर दिया था
लेकिन प्रत्येक वर्ष बाढ़ की थपेड़े झेलता छितौनी बांध पशुओं, आदमीयो,
ट्रैक्टर ट्रालियों के चलने के कारण काफी क्षतिग्रस्त हो गया। बंधे का रखरखाव नहीं होने के कारण रेनकोट और

रेट होल के चलते बंधे के कई स्थानों पर सीपेज भी हुआ जिससे सीमावर्ती गांव के डूबने का आशंका बढ़ चला
प्रशासन ने आनन-फानन में बालू की बोरियों से सीपेज को बंद कर राहत तो पा लिया।
लेकिन बंधे की मरम्मत नहीं हो सकी। आज बंधा भेड़ीहारी से लगाएत भगवानपुर तक जर्जर हो चला है।
जगह जगह लोगों के चढ़ने उतरने, पशुओं के चढ़ने उतरने, एवं बालू लदी ट्रालियों की चढ़ने उतरने से।

पूरा बंधा क्षतिग्रस्त हो चला है। लेकिन बाढ़ खंड केवल ठोकरों की मरम्मत करा कर करोड़ों रुपए प्रत्येक वर्ष सरकार
के धन को वर्वाद करने में लगा हुआ है। पिछले वर्ष हाई लेवल कमेटी ने बाढ़ खंड को किलोमीटर 10.500 पर बने
ठोकर किलोमीटर 11.200 पर बने ठोकर किलोमीटर 9.752 पर बने ठोकर के साथ ठोकर
नंबर 4 से 5 के बीच 3 लेयर परक्यूपाइन डालने का सुझाव दिया था। जिसमें बाढ़ खंड द्वारा
किलोमीटर 9.752 पर ठोकर की पुनर्स्थापना लगभग ₹6करोड़ एवं परक्यूपाइन डालने के लिए 1.5 करोड़ रुपए
स्वीकृत किया। लेकिन अन्य स्वीकृत प्रस्ताव पर धन नहीं मिला जिसके कारण उन ठोकरो पर कोई कार्य नहीं हुआ।
किलोमीटर 9.752 के ठोकर का मरम्मत तो हुआ लेकिन आलम यह है
कि डाउनस्ट्रीम में लगभग 20 मीटर मरम्मत कार्य लांच कर गए जबकि अभी बाढ़ आने की शुरुआत है।
इस ठोकर पर कम वजन के बोल्डर लगाए गए हैं तथा नीचे का बेस बनाने में भारी अनियमितता बरती गई है ।
