World Food Safety Day 2023: जीवन और स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है असुरक्षित भोजन, डब्ल्यूएचओ ने जताई चिंता

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World Food Safety Day 2023: जीवन और स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है असुरक्षित भोजन, डब्ल्यूएचओ ने जताई चिंता

World Food Safety Day 2023: दुनियाभर में खराब और असुरक्षित भोजन की वजह से रोजाना करीब 16 लाख लोग बीमार होते हैं।

जिसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस बार विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस की थीम खाद्य गुणवत्ता से जीवन सुरक्षित रखी है।

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इस मौके पर डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि असुरक्षित भोजन करने से दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के 340 बच्चों की मौत रोजाना होती है।

जबकि दुनियाभर में हर साल 50 लाख लोगों की मौत फूड पॉइजनिंग और उससे जुड़ी दूसरी बीमारियों के कारण होती है।

संगठन का कहना है कि खराब खाना जीवन और स्वास्थ्य दोनों पर भारी पड़ रहा है।

हर साल मोटी रकम की बर्बादी संयुक्त राष्ट्र के अनुसार कम और मध्यम आय वाले देशों में असुरक्षित भोजन से

उत्पादकता बुरी तरह प्रभावित होती है। स्वास्थ्य पर भी मोटी रकम खर्च होती है।

सालाना 110 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती जनसंख्या के बीच खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ेगी।

क्या होता है असुरक्षित खानपान?

-खाना बनाने में बरती गई असावधानी और गंदगी स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।

-आधा पका खाना खाने से भी फूड पॉइजनिंग का जोखिम ज्यादा बना रहता है।

-खुले में रखा खाना खाने से भी बीमार होने की संभावना अधिक बनी रहती है।

-खुले में बिकने वाला स्ट्रीट फूड सेहत के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह है।

-लंबे समय से रखा पैक्ड जूस और दूध भी सेहत के लिए खतरनाक होता है।

फूड पॉइजनिंग के पांच प्रमुख लक्षण-

-102 डिग्री बुखार के साथ डायरिया की तकलीफ

-लगातार तीन दिन तक डायरिया बने रहना

-लगातार उल्टी होने से शरीर में कमजोरी महसूस होना

-मुंह सूखने से शरीर में पानी की कमी महसूस होना

-पेट में असहनीय दर्द खराब खाने का प्रमुख लक्षण

डायरिया और कैंसर का कारक-

असुरक्षित खाना डायरिया से लेकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन रहा है। डब्ल्यूएचओ की सहायक महानिदेशक डॉक्टर मारिया नीरा का कहना है

कि खाना बनाने से लेकर उसे परोसने और पैकेजिंग में होने वाली गड़बड़ी के कारण दुनियाभर में बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है।

बच्चे उठा रहे बीमारियों का बोझ-

डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया की आबादी में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की भागीदारी नौ फीसदी है।

चिंता की बात ये है कि ये बच्चे अकेले दुनियाभर में खाने से होने वाली 40 फीसदी बीमारियों का बोझ अकेले उठाते हैं।

बच्चे और बुजुर्गों के लिए खतरनाक-

अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार खराब खाना बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।

65 और इससे अधिक उम्र के लोगों के साथ छोटे बच्चों के लिए खराब खाना सबसे खतरनाक होता है।

इन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वस्थ व्यस्कों की तुलना में ज्यादा कमजोर होती है।

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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