caesar’s: कैंसर पीड़ितों से ठगी का देशभर में बड़ा नेटवर्क सक्रिय, सोशल मीडिया पर झांसा दे ऐसे बना रहे शिकार
caesar’s: जीवन और मौत के बीच झूल रहे कैंसर पीड़ितों के ठगी का देशभर में बड़ा नेटवर्क बन गया है।
कैंसर (caesar’s) को जड़ से समाप्त करने का दावा कर ये पीड़ित और उनके परिजनों से
ना सिर्फ लाखों की ठगी करते हैं बल्कि उनके जीवन को भी खतरे में डाल देते हैं।
ना सिर्फ इंटरनेट, वेबसाइट और सोशल मीडिया बल्कि देशभर में फैले दलालों के नेटवर्क के माध्यम से
ये पीड़ितों के परिजनों से लाखों की राशि वसूलने का कार्य करते हैं।
सोशल मीडिया पर कैंसर हीलिंग सेंटर, चमत्कारिक जड़ी-बूटी, एटॉमिक-क्वांटम एनर्जी पद्धति से इलाज के कई
सेंटर देश के अलग-अलग हिस्से में संचालित पाए जाते हैं। पटना के अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचने वाले
कैंसर (caesar’s) पीड़ितों से मिली जानकारी के मुताबिक ऐसे सेंटर वाराणसी, रायबरेली, दिल्ली, बेंगलुरू जैसे
बड़े शहरों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के बैतूल, झारखंड के सिमडेगा,
उत्तराखंड के जंगलों में स्थित छोटे कस्बाई शहरों में भी चल रहे हैं।
अस्पतालों के चक्कर और इलाज से निराश होकर जीवन और मौत के बीच जूझते कई
कैंसर (caesar’s) पीड़ित इनके ठगी का शिकार होकर ना सिर्फ अपनी जमा-पूंजी से हाथ धो देते हैं
बल्कि जीवन को गंभीर संकट में डाल देते हैं। आईजीआईएमएस के डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि यहां प्रत्येक सप्ताह सैकड़ों ऐसे मरीज पहुंचते हैं
जो नीम-हकीम के चक्कर में पड़ जाते हैं। ये जड़ी-बूटी से कैंसर (caesar’s) पीड़ितों को
जीवन की उम्मीद दिखाते हैं और बड़ी राशि ऐंठते हैं। इनके बहकावें में आकर
कई लोग दवाइयों का भी सेवन बंद कर अपने जीवन को खतरे में डाल देते हैं।
दवा के इस्तेमाल से पहले उसके प्रभावों के बारे में लें सलाह
कैंसर मरीजों के साक्ष्य आधारित इलाज के लिए एलोपैथ में क्लीनिकल ट्रायल होता है।
ट्रायल के दौरान हिस्टोपैथोलॉजी कर डीएनए और आरएनए से खराब अंगों और उस पर असर होने वाली
दवाइयों का इस्तेमाल इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी अथवा कीमो के माध्यम से दिया जाता है।
नीम-हकीम अथवा वैध द्वारा दी जाने वाली जड़ी-बूटियों का कोई आधार नहीं होता है।
इसके सेवन का कितने लोगों को कितना फायदा हुआ है इसका कोई प्रामाणिक आंकड़ा भी नहीं है।
ऐसे में कैंसर पीड़ितों व उनके परिजनों को किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले उसके प्रभावों के बारे में भी
चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। -रिदु शर्मा, कैंसर रोग विशेषज्ञ, मगध कैंसर हॉस्पीटल, पटना
बाजार समिति के फल विक्रेता राजेश को लिवर के कैंसर का पता चला।
लखनऊ के कैंसर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। इस बीच वहां उनको एक व्यक्ति ने बेंगलुरु में
क्वांटम पद्धति से कैंसर ठीक करने वाली महिला के बारे में जानकरी दी।
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी उसके चमत्कारों की चर्चा थी।
उससे प्रभावित राजेश के परिजन उसके संपर्क में आए। पांच लाख के कुल पैकेज की मांग महिला ने की।
एडवांस के रूप में दो लाख रुपये भी भेजा गया। बदले में एक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट दिया गया
और उसके माध्यम से ध्यान करने की सलाह दी गई। कोई फायदा नहीं हुआ।
मुजफ्फरपुर के 28 वर्षीय रजनीश मुंह और गले के कैंसर से पीड़ित थे।
उनका ऑपरेशन भी पटना के एक बड़े कैंसर संस्थान में हुआ था। ठीक नहीं हुए तो चार माह बाद मुंबई के टीएमएच ले
जाया गया। डॉक्टरों ने कोई उम्मीद नहीं बची होने की जानकारी दी।
इसके बाद उनके परिजन बनारस के एक केंद्र में ले गए। वहां 90 हजार की दवाइयां दी गई।
इस बीच कैंसर का दर्द इतना बढ़ गया कि रजनीश को पेन एंड पेलिएटिव
क्लीनिक में भर्ती करना पड़ा। यहां दर्द कम करने की कोशिश होती है।
आईजीआईएमएस में गॉल ब्लाडर के कैंसर का इलाज कराने आई बेबी नूरजहां को कैंसर (caesar’s) की जानकारी छह
माह पहले ही हो गई थी। उसके पति उसको डॉक्टर के पास ना ले जाकर झारखंड के एक हकीम के पास ले गए।
वहां जड़ी-बूटी का इलाज चला। उसके बाद एक आयुर्वेदिक डॉक्टर के संपर्क में भी दवा चली।
इस बीच बेबी का दर्द बढ़ता गया। कोई सुधार नहीं होता देख परिजन
आईजीआईएमएस ले आए। तब तक कैंसर खतरनाक स्टेज में पहुंच चुका था।
बक्सर के डब्बू के मुंह और गले के कैंसर की सर्जरी दिल्ली में हुई।
इलाज के बावजूद कैंसर शरीर के दूसरे हिस्से में फैल गया। कई बड़े अस्पतालों में इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी का भी
फायदा नहीं हुआ। डॉक्टर ने पेन एंड पेलिएटिव केयर की सलाह दी।
इस बीच परिजनों को एक वेबसाइट से दिल्ली के कैंसर हीलिंग सेंटर की जानकारी मिली।
वहां एक सप्ताह के इलाज के लिए 70 हजार की दवाइयां दी गई।
कुल पांच सप्ताह तक दवा चलने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ और अंत में पीड़ित की मौत हो गई।
