asthma: पूर्वांचल और बिहार में महिलाओं पर ज्‍यादा हमलावर है ये बीमारी, एम्‍स की रिसर्च से खुलासा

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asthma: पूर्वांचल और बिहार में महिलाओं पर ज्‍यादा हमलावर है ये बीमारी, एम्‍स की रिसर्च से खुलासा

asthma: पूर्वांचल और बिहार में अस्थमा पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर ज्यादा हमलावर है।

जबकि आमतौर पर देश के दूसरे हिस्सों में अस्थमा पुरुषों में अधिक है।

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यह सामने आया है अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की रिसर्च में।

कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर के निर्देशन में एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग ने

ओपीडी में पहुंचे 966 अस्थमा मरीजों पर रिसर्च की है।

इसमें से आधे से अधिक महिलाएं रहीं। खास बात यह है कि अनुवांशिक कारणों से अस्थमा के

मामले देश के अन्य प्रांतों के मुकाबले पूर्वांचल में कम हैं।

यह रिसर्च की है पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉ. देवेश प्रताप सिंह व डॉ. सुबोध कुमार ने।

डॉ. देवेश ने बताया कि ओपीडी में अगस्त 2020 से जुलाई 2021 तक 2864 मरीज

इलाज के लिए पहुंचे। इसमें करीब 1187 मरीजों में अस्थमा की तस्दीक हुई,

जो कुल मरीजों का करीब 42 फीसदी है। इसमें से 966 मरीजों ने रिसर्च में शामिल होने की सहमति

दी। इनमें 81 फीसदी मरीजों में पहली बार अस्थमा की पुष्टि हुई।

अस्थमा के कुल मरीजों में 52 फीसदी महिलाएं मिली है। यह हैरान करने वाला तथ्य है।

सिर्फ 6 फीसदी में स्मोकिंग हिस्ट्री

उन्होंने बताया कि इस रिसर्च के कई सकारात्मक आयाम मिले।

महज छह फीसदी में ही स्मोकिंग की हिस्ट्री रही। करीब 63 फीसदी मरीजों की

उम्र 18 से 45 वर्ष के बीच रही। मरीजों में 59 फीसदी शहरी और 41 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र के

निवासी रहे। इसकी वजह धूल, धुआं, प्रदूषण व घरों में एयर- वेंटिलेशन माना जा रहा है।

सबसे खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर कारणों में सुधार हो सकता है।

इससे अस्थमा नियंत्रित हो सकता है। यह शोध अंतराष्ट्रीय

जर्नल क्यूरियस के मई के अंक में प्रकाशित हुआ है।

कम मिले अनुवांशिक मामले

डॉ.देवेश ने बताया कि देश में हुई अब तक रिसर्च में आमतौर पर अस्थमा के 25 से 35मामले

अनुवांशिक मिलते रहे हैं। इसमें मरीज के फैमिली हिस्ट्री में अस्थमा मिलता है।

पूर्वांचल में यह तस्वीर ज्यादा है। यहां सिर्फ 9.3 मरीजों में अस्थमा की फैमिली हिस्ट्री मिली है।

चेस्‍ट फिजिशियन डॉ.देवेश प्रताप सिंह ने बताया कि अस्थमा के करीब 80 फीसद

मरीज खांसी और सीने में जकड़न की समस्या लेकर इलाज कराने पहुंचे थे।

कुछ मरीजों में सीने में जकड़न के साथ सांस लेने में घरघराहट हो रही थी।

इसमें सक्रिय तौर पर स्मोकिंग करने वाले सिर्फ 1.34 फीसदी मरीज ही रहे।

एम्‍स की कार्यकारी निदेशक डॉ.सुरेखा किशोर ने बताया कि देश के कई

हिस्सों में अस्थमा (asthma) की मुख्य वजह प्रदूषण, स्मोकिंग और अनुवांशिक कारक होते हैं।

रिसर्च में पता चला कि पूर्वांचल व पश्चिमी बिहार में यह कारक ज्यादा प्रभावी नहीं हैं।

इससे अस्थमा को नियंत्रित करने की योजना बनाने में आसानी होगी।

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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