wildlife:CM योगी सफेद बाघिन को बाड़े में भेज तेंदुए के बच्चों का करेंगे नामकरण? जानिए कब
वन्य जीव सप्ताह (Wildlife) के तहत बुधवार का दिन गोरखपुर चिड़ियाघर के लिए बेहद खास होगा.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस दिन चिड़ियाघर में ढाई माह पहले लाई गई
सफेद बाघिन गीता को क्रॉल से मुख्य बाड़े में प्रवेश कराने के साथ तेंदुए के दो बच्चों का नामकरण भी करेंगे.
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी ने वाइट टाइगर को मुख्य बाड़े में प्रवेश कराए जाने के साथ ही पर्यटक,
अब इसका दीदार भी कर सकेंगे. वहीं, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर चिड़ियाघर प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है.
मार्च 2021 को सीएम योगी ने किया था लोकार्पण
दरअसल, गोरखपुर में चिड़ियाघर की स्थापित का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को है.
जिसका लोकार्पण मार्च 2021 को सीएम योगी ने किया था. उनकी मंशा गोरखपुर चिड़ियाघर यानी
शहीद अशफाकउल्ला खां प्राणी उद्यान को देश का नायाब चिड़ियाघर बनाने की है.
उनकी ही पहल पर योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सरकार की सौ दिन की
कार्ययोजना में गोरखपुर चिड़ियाघर को वाइट टाइगर की सौगात देने का निर्णय लिया गया था.
मुख्यमंत्री योगी देंगे पर्यटकों को नई सौगात
आपको बता दें कि कार्ययोजना पर अमल करते हुए 20 जून को ‘गीता’ नाम की
सफेद बाघिन को लखनऊ चिड़ियाघर से गोरखपुर चिड़ियाघर लाया गया.
इस वाइट टाइगर को अनुकूलन के लिए पहले क्वारंटीन किया गया था.
फिर क्रॉल में रखा गया था. मुख्यमंत्री योगी ने बुधवार को गोरखपुर चिड़ियाघर पहुंचेंगे,
जहां वह वाइट टाइगर को क्रॉल से मुख्य बाड़े में रिलीज कर पर्यटकों को नई सौगात देंगे.
सीएम ने दो गैंडों को खिलाया था केला
बता दें कि चिड़ियाघर में सीएम योगी तेंदुए के 2 बच्चों का नामकरण भी करेंगे.
फिलहाल, तेंदुए के दोनों बच्चों को चिड़ियाघर अस्पताल में रखा गया है.
इसके साथ ही चिड़ियाघर प्रशासन की और भी तैयारियां किया गया तैयारी कानपुर चिड़ियाघर से लाए जा रहे
दो हिमालयन ब्लैक बीयर (भालू) को भी मुख्यमंत्री के हाथों बाड़े में रिलीज कराने की है.
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी का पशुओं के प्रति स्नेह भाव कई बार देखने को मिलता है.
जानकारी के मुताबित इससे पहले सीएम योगी बीते 18 मार्च को गोरखपुर चिड़ियाघर गए थे.
तब उन्होंने हर और गौरी नाम के दो गैंडों को केला खिलाया था.
सीएम ने दोनों गैंडों को प्यार से उनका नाम लेकर बुलाया, तो वो बाड़े में
उनके पास आ गए थे. ठीक वैसे ही जैसे गोरखपुर की गौशाला में गायें चली आती हैं.
