GST में फंस गया दुल्हन का लहंगा, रेडीमेड गारमेंट खरीदने में ऐसे कट रही ग्राहकों की जेब

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GST में फंस गया दुल्हन का लहंगा, रेडीमेड गारमेंट खरीदने में ऐसे कट रही ग्राहकों की जेब

गोरखपुर में रेडीमेड गारमेंट से लेकर दुल्हन के लहंगे में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के पेंच से ग्राहकों की

ही जेब कट रही है। लहंगा रेडीमेड में है या साधारण कपड़ा इसपर दुविधा दूर नहीं होने का नतीजा है

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कि ग्राहकों को 12 जीएसटी देना पड़ रहा है। इसी तरह रेडीमेड गारमेंट में कीमतों में पेंच में ग्राहकों की जेब कट रही है।

जीएसटी (GST) एक बार ही सरकार को अदा करना होता है। 999 रुपये के रेडीमेड कपड़े पर यदि 5 जीएसटी है,

तो अंतिम ग्राहक से भी 5 ही टैक्स लिया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है।

असुरन पर रेडीमेड गारमेंट के दुकानदार सुनील गुप्ता ने थोक में फ्रॉक 970 रुपये में खरीदा।

इस पर उन्हें 5 जीएसटी देना पड़ा। लेकिन मुनाफा जोड़कर ग्राहक को 1150 रुपये में बेचा तो

कम्प्यूटर ने 12 जीएसटी (GST) वसूल लिया। सुनील बताते हैं कि ‘रिर्टन दाखिल करने पर 5 ही वापस मिलेगा।

लेकिन ग्राहक से वसूली गई 7 रकम बिना मतलब के सरकार के पास पहुंच गई।

रेडीमेड फैक्ट्री के मालिक विनोद मौर्या का कहना है कि ‘नियम के पेंच के चलते ग्राहक को 7 अतिरिक्त देना पड़ रहा

है। सिर्फ गोरखपुर में ऐसे करोड़ों रुपये का टैक्स सरकार के खाते में जमा हो रहा है।’

गोलघर में कई प्रमुख व्यापारी इस मामले में वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों के समक्ष उठा चुके हैं,

लेकिन वह जीएसटी काउंसिल का मामला होने की बात करते हुए टाल देते हैं।

रेडीमेड कारोबारी कासिफ अली का कहना है कि ‘काउंसिल को

इस बातत व्यापारियों से दर्जनों पत्र लिखे हैं। लेकिन इस खामी को दूर नहीं किया जा रहा है।’

जीएसटी (GST) में फंस गया दुल्हन का लहंगा

लहंगे को रेडीमेड मानते हुए 12 जीएसटी लिया जाता है। लेकिन पादरी बाजार की आशा वर्मा सवाल करती हैं

कि ‘लहंगा कोई बिना सिलाए पहन सकता है क्या? लहंगे और ब्लाउज की सिलाई में

1000 से 2000 रुपये का खर्च है। ऐसे में लहंगे को कैसे रेडीमेड माना जा सकता है?’

हालांकि मल्टी ब्रांड स्टोर इस विवाद से बचने के लिए सिलाई जोड़कर ही ग्राहकों से रकम लेते हैं।

दुकानदान ब्लाउज और लहंगे की फीटिंग करा कर देते हैं। लेकिन हकीकत यह है

कि इन दुकानों पर लहंगा 15 हजार रुपये से कम कीमत में है भी नहीं। कारोबार अरुण बलानी कहते हैं

कि ‘लहंगे से भ्रम की स्थिति साफ होनी चाहिए। ग्राहकों को राहत मिलनी चाहिए।’

फाइन होजरी, निदेशक, जहरुल्लाह ने कहा कि लहंगा से लेकर रेडीमेड गारमेंट पर दो तरह की

जीएसटी (GST) को लेकर शुरुआत में ही विरोध दर्ज कराया गया।

एक उत्पाद को एक ही स्लैब के दायरे रखा जाना चाहिए। जिस गरीब को लाभ देने के लिए व्यवस्था बनी,

उसे ही लाभ नहीं मिल रहा है। एस के अग्रवाल ने बताया कि गोरखपुर रेडीमेड गारमेंट के

हब के रूप में विकसित हो रहा है। व्यापारियों की तरफ से जीएसटी की खामी को लेकर तथ्य प्रकाश में आए हैं।

मुख्यमंत्री से मिलकर इस खामी को दूर करने के लिए मांग पत्र सौंपा जाएगा।

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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