Drishyam 2 Review: रीमेक होकर भी ओरिजनल सी दिखी ‘दृश्यम 2’, अजय देवगन की आंखों ने किया सारा कमाल

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Drishyam 2 Review: रीमेक होकर भी ओरिजनल सी दिखी ‘दृश्यम 2’, अजय देवगन की आंखों ने किया सारा कमाल

Drishyam 2 Review: हिट फिल्म ‘दृश्यम’ की सीक्वल ‘दृश्यम 2’ की शूटिंग अभी इसी साल फरवरी में शुरू हुई

और फिल्म सिनेमाघरों तक पहुंच भी गई। मूल रूप से मलयालम में बनी दोनों फिल्में कामयाब रहीं।

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हिंदी में भी ‘दृश्यम’ हिट रही और अब ‘दृश्यम 2’ भी उसी राह पर है।

फिल्म ‘दृश्यम 2’ का असली सितारा इसकी कसी हुई कहानी है।

मूल फिल्म में हालांकि फिल्म का शुरुआती हिस्सा थोड़ा धीमा लगता है,

इसकी रीमेक में निर्देशक अभिषेक पाठक ने फिल्म को थोड़ा कस दिया है।

दिलचस्प बात ये है कि मलयालम में बनी ‘दृश्यम 2’ देखने के बाद भी इसका हिंदी रीमेक देखने की उत्सुकता आखिर तक

बनी रहती है। फिल्म का क्लाइमेक्स ही फिल्म की असल जान है

और इसका पहले से पता होने के बाद भी इसका फिर से आनंद लेना कुछ कुछ वैसा ही जैसे वनीला आइसक्रीम का

स्वाद पता होने के बाद भी उसे बार बार खाने के लिए मन का ललचाते रहना।कहां दबी है लाश?

फिल्म ‘दृश्यम 2’ की कहानी वहां से शुरू होती है जहां एक पुलिस अधिकारी की बेटे की हत्या हो जाने का तो

खुलासा हो चुका है लेकिन उसकी लाश नहीं मिलती है। पिता अपने बेटे की आत्मा की मुक्ति के लिए

उसके शव का अंतिम संस्कार करना चाहता है। लेकिन, उसे तो विजय सालगांवकर ने ऐसी जगह गाड़ दिया था

जहां से चाहकर भी उसे निकाला नहीं जा सकता। लेकिन, मां भी लौट आई है।

उसे चौथी क्लास तक पढ़े विजय से ही नहीं पूरे परिवार से बदला लेना है।

उसके साथ पढ़ा दूसरा आईपीएस अफसर उसकी कुर्सी पर है।

ये अफसर मीरा से भी ज्यादा तेज दिमाग दिखता है। लेकिन, मामला यहां फिल्मी है।

जी हां, विजय सालगांवकर का हर पैंतरा किसी न किसी फिल्म की कहानी से निकलता है

और इस बार फिल्मी पुलिस पर फिल्मी पैंतरा भारी पड़ता है।

पल पल बढ़ते रोमांच का आनंद

हिंसा और रोमांस पर बनी अधपकी कहानियों से बोर हो चुके हिंदी सिनेमा के दर्शक भी विश्व सिनेमा के दूसरे

दर्शकों की तरह अपनी रगों में खून की रफ्तार तेज कर देने वाली फिल्में देखना चाहते हैं।

थ्रिलर दुनियाभर में बीते एक दशक में सबसे कामयाब फिल्म श्रेणी रही है।

दर्शकों की इस पसंद पर फिल्म ‘दृश्यम 2’ खरी उतरती है। फिल्म की आत्मा इसकी कहानी में बसती है

और बिना इसमें कुछ ज्यादा छेड़छाड़ किए अभिषेक और आमिल ने इसका हिंदी रूपांतरण बढ़िया बना लिया है।

दोनों ‘हिट द फर्स्ट केस’ के हिंदी रीमेक के क्लाइमेक्स में की गई बेवकूफी जैसी कोई हरकत करने से दूर रहे हैं

और फिल्म हालांकि मूल फिल्म की फ्रेम टू फ्रेम कॉपी जैसी ही है

लेकिन क्लाइमेक्स का गठन और प्रस्तुतिकरण अभिषेक ने बदल लिया है।

फिल्म के किरदार अपने रंग बदलते रहते हैं और इन बदलते रंगों से ही फिल्म ‘दृश्यम 2’ का इंद्रधनुष बनता है।

अजय देवगन ही अव्वल नंबर

कलाकारों में ये फिल्म पूरी की पूरी अजय देवगन की है। फिल्म ‘दृश्यम 2’ में वह मोहनलाल जैसा ही

रूप भी धारण किए हैं। हालांकि मामला चूंकि अजय देवगन का है

तो उनका सिनेमाघर भी सिंगल थिएटर न होकर मल्टीप्लेक्स है।

कहने का मतलब ये कि विजय सालगांवकर का आभामंडल जॉर्जकुट्टी से ज्यादा रईस है।

सिर्फ आंखों से अभिनय करना है तो फिलहाल अजय देवगन के मुकाबले का दूसरा किरदार हिंदी सिनेमा में तो

दूर दूर तक नहीं दिखता और फिल्म ‘दृश्यम 2’ के इस किरदार को निभाने की असल जरूरत भी यही थी।

श्रिया सरन सामान्य दृश्यों में भी अपने कंठ स्वर का पूरा इस्तेमाल क्यों नहीं करतीं, वही जानें।

हां, दो बच्चों की चुस्त तंदुरुस्त मां के किरदार के लिए वह बिल्कुल फिट हैं।

इशिता दत्ता और मृणाल जाधव दोनों अब काफी बड़ी हो चुकी हैं।

फिर भी सीक्वल की कहानी के हिसाब से दोनों अपनी अपनी जगह फिट हैं।

अक्षय खन्ना ने दिया मजबूत सहारा

फिल्म ‘दृश्यम 2’ में तब्बू और रजत कपूर का काम सीमित ही है। इस बार अजय देवगन के मुकाबले कैमरे के सामने

उतरे हैं अक्षय खन्ना। अभिषेक पाठक ने अक्षय खन्ना को इस किरदार के लिए लेकर

बिल्कुल सही फैसला भी किया है। परदे पर उनकी एंट्री के लिए जूनियर पुलिस कर्मियों के आपसी संवादों का उपयोग

उनके किरदार को लेकर दर्शकों के मन में रुचि जगाता है। अक्षय ने अपने चेहरे के भावों के जरिये

इस किरदार को जिया भी बहुत बढ़िया है। कमलेश सावंत ने एक बार फिर फिल्म के क्लाइमेक्स को रफ्तार दी है।

उनका मराठी लहजा फिल्म की कहानी को दम देता है। सौरभ शुक्ला फिल्म में पटकथा लेखक बने हैं

और अपने किरदार के जरिये फिल्म मे जरूरी रोमांच बनाने में

अच्छी मदद करते हैं। तारीफ के लायक काम नेहा जोशी ने भी किया है।

साथ हम रहें…

तकनीकी रूप से भी फिल्म ‘दृश्यम 2’ हाल फिलहाल की हिंदी फिल्मों से बेहतर फिल्म बन पड़ी है।

एक अच्छी टीम चुनने का फायदा निर्देशक अभिषेक पाठक को उनकी पहली हिट फिल्म के रूप में मिलता दिख रहा है।

सुधीर चौधरी ने गोवा को बिल्कुल अलग नजरिये से कैमरे से देखा है।

क्लाइमेक्स के कुछ दृश्यों में दिखी गोवा की खूबसूरती बेमिसाल है।

संदीप फ्रांसिस ने मूल फिल्म से इसकी हिंदी रीमेक की अवधि 13 मिनट कम रखने का कमाल किया है।

फिल्म ‘दृश्यम 2’ संगीतकार देवी श्री प्रसाद (डीएसपी) की पहली ऐसी हिंदी फिल्म है

जिसके सारे गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक उन्होंने दिया है। जुबिन नौटियाल का गाया ‘साथ हम रहें’ पहले ही हिट हो

चुका है लेकिन फिल्म ‘दृश्यम 2’ का असल गाना वह रैप सॉन्ग है

जो एंड क्रेडिट्स में बजता है। फिल्म ऐसी है जिसका असली आनंद परिवार के साथ भी लिया जा सकता है।

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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