unique wedding: बछड़ा बना दूल्हा बछिया बनी दुल्हन; बारात में नाचा पूरा गांव, कार्ड भी छपवाया
unique wedding: खरगोन के प्रेम नगर गांव में रहने वाले दो परिवारों ने अनूठी शादी का आयोजन किया।
इसमें एक बछड़ा और बछिया को परिवार वालों ने पाल कर बड़ा किया था।
दरअसल प्रेमनगर निवासी मुकेश दिवाले की कोई संतान नहीं है। ऐसे में उन्होंने अपनी बछिया जिसका नाम लक्ष्मी है।
उसे बेटी मानकर उसे पूरे संस्कारों के साथ शादी कर विदा किया।
गांव की ही ज्योति लिमये के भी पति की मौत होने के बाद वह अकेली हो गई थी।
ज्योति की एक बेटी थी उसकी भी शादी हो गई है। उनके यहां जो गाय का बछड़ा है उसका नाम नारायण है।
उसे उसने देखभाल कर बड़ा किया है था। ज्योति का बेटा नहीं होने से उन्हें गाय के बछड़े से उसे बेटे की तरह
ही प्रेम किया और बछड़े को ही उसने बेटा मान लिया। अब उन्हें बछड़े रूपी बेटे की शादी का ख्याल आया तो
उन्होंने अपने आसपास गायकी बछिया तलाश करनी शुरू की। उन्हें मुकेश की बछिया लक्ष्मी के बारे में पता चला।
दोनों ही परिवारों ने मिलकर रिश्ते की शुरुआत की और फिर पंडित जी से बात कर शादी का मुहूर्त तय हुआ।
unique wedding का कार्ड भी छपवाया गया
शादी के लिए बकायदा सामान्य विवाह की तरह निमंत्रण पत्र छपवा गए और बाकी की रेस में भी निभाई गई।
शादी में करीब एक हजार कार्ड बांटे गए। दोनों ही परिवारों ने पूरे हर्षोल्लास के साथ गाय की बछिया और
बछड़े के विवाह समारोह को संपन्न कराया। इस पूरे विवाह समारोह मे रिश्तेदार और
ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। शादी में लगभग 4 लाख रूपये का खर्च भी आया।
बछड़े-बछिया ने लिए सात फेरे
गाय के बछड़े नारायण की बाकायदा बरात भी निकाली गई। नारायण को दूल्हा बनाकर
गाय की बछिया लक्ष्मी के घर ले जाया गया। बारात में बाराती बने ग्रामीणों ने डीजे की धुन पर जमकर ठुमके भी लगाए।
शादी के लिए पूरी तरह रस्मो रिवाज का भी ख्याल रखा गया। दूल्हा और दुल्हन को हल्दी लगाई गई ,
सात फेरे लिए गए। इस शादी में गाय की बछिया लक्ष्मी को दहेज के रूप में पांच बर्तन भी दिए गए।
बछिया के मालिक मुकेश दिवाले ने बताया कि सनातनी संस्कृति में गाय को गौ माता का दर्जा दिया जाता है
और वह एक गोपालक है। उनकी कोई संतान भी नहीं है। इसलिए उन्होंने गाय की बछिया जिसका नाम लक्ष्मी है,
उसे बेटी की तरह पाल कर बड़ा किया है। 2 माह पूर्व ज्योति ने लक्ष्मी के लिए अपने बछड़े नारायण का रिश्ता लेकर
आई थी। जिसके बाद हमने यह शादी तय की और अब मैं अपनी बेटी जैसी बछिया का कन्यादान कर रहा हूं।
वहीं बछड़े नारायण की पालक ज्योति ने बताया कि उनके पति की पेंशन से उन का भरण-पोषण होता है।
एक बेटी का विवाह वह कर चुकी हैं। बछड़े नारायण को ही वह अपना बेटा मानती हैं।
ऐसे में उसकी शादी बेटे की ही तरह पूरी धूमधाम से करना चाहती थी।
जो अब संपन्न हो रही है। उन्होंने लगभग 800 लोगों को शादी का न्योता देकर भोज भी कराया है।
