social media:बढ़ रही आत्महत्या की घटना, माता-पिता के सपने व सोशल मीडिया ने विद्यार्थियों पर डाला दबाव

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social media:बढ़ रही आत्महत्या की घटना, माता-पिता के सपने व सोशल मीडिया ने विद्यार्थियों पर डाला दबाव

social media: कुछ वर्षों के दौरान पश्चिम बंगाल में छात्रों के आत्महत्या करने की घटनाएं घटी हैं.

हालांकि यह बहुत कम ही है. इसका एक महत्वपूर्ण कारण तीव्र शैक्षणिक दबाव और

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सामाजिक अपमान के कारण एक हीन भावना का विकास रहा है.

सोशल मीडिया अपनी नकारात्मक विषाक्तता के साथ विस्तार कर रहा है,

ट्रोल के साथ-साथ वायरल हो रहे अपमान के उदाहरण युवाओं को उस चरम कदम की ओर धकेल रहे हैं.

परिवार का हाई स्कोर करने का दबाव

इस साल जून में उच्चतर माध्यमिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के कुछ दिनों बाद राज्य के मालदा जिले की

निवासी 18 वर्षीय सुप्ती हलदर (बदला हुआ नाम) ने परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं होने के कारण फांसी लगाकर आत्महत्या कर

ली.पता चला कि लड़की पर पहले से ही उसके परिवार का उच्च अंक लाने का दबाव था,

जिससे वह अंदर ही अंदर तनाव में थी और परीक्षा में असफल होने के बाद वह दबाव

उसके परिवार के सदस्यों के साथ-साथ उसके रिश्तेदारों के अपमान में बदल गया.

सामाजिक अपमान के इस दबाव ने उन्हें स्कूल के जिला निरीक्षक के कार्यालय के सामने

अन्य असफल छात्रों द्वारा आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया,

जहां उन्हें जल्द ही अग्रणी और सबसे मुखर भूमिका निभाते हुए देखा गया.जल्द ही उसका चेहरा मीडिया के माध्यम से

वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर अपमान की एक लहर शुरू हो गई और

परीक्षा में उत्तीर्ण न होने के बाद भी विरोध में भाग लेने के लिए ट्रोल्स ने उसके दुस्साहस पर

सवाल उठाया.यह सुप्ती के लिए असहनीय हो गया और उसने चरम कदम उठाने का फैसला किया.

सोशल मीडिया भी है इसकी वजह

कोलकाता स्थित एक कॉलेज और अस्पताल की फैकल्टी और कलकत्ता विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के एक

विजिटिंग फैकल्टी डॉ. तीथर्ंकर गुहा ठाकुरता के अनुसार घटनाओं के पूरे क्रम से यह स्पष्ट है

कि पहले उसके माता-पिता और शिक्षक और बाद में सोशल मीडिया पर सक्रिय एक वर्ग ने लड़की को

आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया. गुहा ठाकुरता ने कहा, हर छात्र की अपनी शैक्षणिक उपभोग क्षमता होती है.

इस विशेष मामले में पहले तो माता-पिता ने यह मानने से इनकार कर दिया

और परीक्षा से पहले भी वे उस पर दबाव बनाते रहे. लेकिन जब बात नहीं बनी और वह असफल हो गई,

तो उसके अपनों द्वारा अपमान का दौर शुरू हो गया, जो आसानी से उसके साथ

सहानुभूति रख सकता थे और उसे अगली बार बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते था.

सोशल मीडिया (social media) विषाक्तता के नकारात्मक प्रभाव

मेरी राय में लगातार अपमान ने उसे विरोध में भाग लेने के लिए प्रेरित किया,

क्योंकि उसने सोचा कि यह इस अपमान को रोकने का अंतिम उपाय है.

लेकिन बेचारी लड़की को यह एहसास नहीं था कि उसके इस कदम से एक व्यापक अपमान होगा.

ट्रोल्स ने लड़की की हताशा को पहचानने की कोशिश भी नहीं की.

गुहा ठाकुरता ने कहा, पहले, हमारे समय में दबाव केवल आंतरिक तिमाहियों से था

और अब दबाव कई तिमाहियों से है. यह सोशल मीडिया विषाक्तता के नकारात्मक प्रभाव की त्रासदी है.

अकादमिक प्रशासक सुचिस्मिता बागची सेन के अनुसार छात्रों पर उपलब्धि का दबाव जो

पहले मुख्य रूप से अकादमिक परिप्रेक्ष्य पर केंद्रित था, अब विविध हो गया है.

सेन ने कहा, अपने बच्चों के अल्बर्ट आइंस्टीन या अमर्त्य सेन या कल्पना चावला बनने के सपने को पोषित करने के

अलावा, माता-पिता अपने बच्चों के पीटी उषा या सचिन तेंदुलकर या लता मंगेशकर बनने के समानांतर

सपनों को भी पोषित करना चाहिए. इसलिए छात्रों के लिए खेलकूद या संगीत

जैसी पाठ्येतर गतिविधियों को भी प्रतियोगिता में लपेटा गया है.

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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