bull: महिला पर सांड का हमला, सींग पेट के आर-पार, एक हफ्ते में चौथी मौत पर भड़का गुस्सा
bull: यूपी के सीतापुर के मिश्रिख कोतवाली इलाके के कुतुबनगर कस्बे में आवारा सांड़ के हमले से 55 वर्षीय
महिला की मौत हो गई। ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में उनका इलाज चल रहा था।
सांड़ के हमले से उनकी आंतें फटकर बाहर निकल आई थीं। शव पहुंचते ही घर में कोहराम मच गया।
जिले में सांड़ों के हमले से लगातार हो रही मौतों से लोगों में खासा रोष है।
कुंतादेवी पत्नी तनकुन्नू शुक्रवार की शाम घर के बाहर काम कर रही थी इस दौरान सांड़ (bull) ने उन्हें पटक दिया था।
सींग पेट के आरपार हो गई थी। घायल महिला कुंती देवी को लखनऊ ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था।
उनकी हालत नहीं सुधरी वह बेहोशी से नहीं उबर सकीं। रविवार की सुबह 11 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
जिले में एक सप्ताह के भीतर सांड़ों के हमले से यह चौथी मौत है। एक साल के भीतर सीतापुर जिले में यह 15वीं मौत है।
लोगों में गुस्सा
आवारा मवेशियों को लेकर लोगों में गुस्सा भड़क रहा है। कमलापुर इलाके में लगातार मौतों से गुस्साए किसानों ने
रविवार को सैकड़ों मवेशियों को स्कूल और अस्पताल परिसर में बंद कर दिया। परिसर के बाहर भारी भीड़ ने
नारेबाजी की है। गुस्साए लोग देर रात तक डटे रहे। देर शाम तक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे थे।
ग्राम पंचायत खुर्दा के ग्रामीणों ने करीब दो सैकड़ा से ऊपर आवारा पशुओं को पकड़कर रविवार की दोपहर पुरेना के
लाला दामोदर दास रस्तोगी जूनियर हाईस्कूल में बंद कर दिया। ग्रामीणों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन भी किया है।
अधिकारियों से शिकायत के बावजूद पकड़े गए पशुओं को देर शाम तक गोशाला नहीं भिजवाया गया।
न ही कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा। किसानों ने बताया आवारा पशुओं ने किसानों का जीना दूभर कर रखा है।
काफी संख्या में आवारा पशु किसानों की फसलों को चट कर रहे हैं।
किसानों द्वारा खेतों से आवारा पशुओं को भगाने पर वह आक्रामक हो जाते हैं
और किसानों पर हमला कर रहे हैं। जिससे क्षेत्र के कई किसान गम्भीर रूप से घायल भी हो चुके हैं।
किसान रामू ने बताया कि काफी संख्या में आवारा पशु खेतों में घूम रहे हैं तथा फसलों को बर्बाद करने पर तुले हैं।
आवारा पशुओं को गांव के स्कूल में किया बंद
गुस्साए किसानों ने दो सैकड़ा से ऊपर आवारा पशुओं को खेतों से पकड़कर गांव के स्कूल में बंद कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बीडीओ व ग्राम प्रधान सहित अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद किसी भी
अधिकारी ने इन पशुओं की खबर लेना गंवारा नहीं समझा। सोहन, रामू, रमेश आदि किसानों का कहना है
कि प्रशासन उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। किसानों में रोष है।
पीएचसी बम्भेरा में आधा सैकड़ा बंद किए मवेशी आक्रोशित किसानों ने लाठी-डंडा लेकर आधा सैकड़ा आवारा पशुओं को
खेतों से खदेड़कर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में बंद कर दिया है। किसानों ने पीएचसी के बाहर जोरदार नारेबाजी की।
अधिकारियों को घटना से अवगत कराया, लेकिन देर शाम तक कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
स्कूल और पीएचसी बम्भेरा में बंद मवेशी भूख-प्यास से व्याकुल हैं।
इनकी सुधि कोई लेने वाला नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि आवारा पशुओं को गोशाला में भिजवाया जाए।
40 हजार आवारा मवेशियों का खेतों-सड़क पर कब्जा
सीतापुर में जनमानस को छुट्टा पशुओं से छुटकार दिलाने की कोशिशें सफल होती नहीं दिख रही हैं।
गोशालाओं में पशु बांधे जाने के बावजूद उनकी संख्या में लगतार इजाफा होता जा रहा है।
कितने पशु छुट्टा हैं, पशुपालन विभाग के पास इसका आंकड़ा नहीं है।
विभाग का अनुमान है कि 38 हजार से अधिक पशु अभी भी छुट्टा हैं, जिन्हें पकड़कर गोशालाओं में पहुंचाए जाने की
जरूरत है। वहीं गोशालाएं पूरी तरह से भरी हुई हैं। विभाग को नई गोशालाओं का इंतजार है।
जिले में आठ लाख से अधिक पशु हैं। इसमें 4 लाख 70 हजार दुधारू पशु हैं
इनमें नस्लदार पशुओं की संख्या सिर्फ 90 हजार के करीब है। नस्लदार दुधारू पशुओं के अलाव ज्यादातर पशु सिर्फ
उसी समय तक पालतू रहते हैं, जबतक वो दूध दे रहे होते हैं। दुहान बंद होती ग्रामीण पशुओं के खूंटे से खोल देते हैं।
ऐसे में छुट्टा पशुओं की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। उधर पशुपालन विभाग सविलांस फेल है।
विभाग के पास कितने पशु छुट्टा हैं, इसका सटीक लेखा जोखा नहीं है।
विभाग जिले में संचालित हो रही 122 गो आश्रय स्थलों में पकड़-पकड़कर बंद कर रहा है। गोआश्रय स्थलों में जगह
नहीं बची है। ऐसे में जनमानस को छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने के लिए चल मुहिम कामयाब होती नहीं दिख रही है।
किसान परेशान हैं। उन्हें फसलों को बचाना मुश्किल हो रहा है। छुट्टा पशुओं के हमले में इसी वर्ष 15 से अधिक लोगों की
जान जा चुकी है। लहरपुर, मिश्रिख और सिधौली सर्वाधिक प्रभावित तहसील क्षेत्र हैं।
किसान छुट्टा पशुओं से छुटकारा पाने के लिए कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन उनकी सुनी नहीं जा रही है।
संसाधनों के अभाव में शासन की ओर से छुट्टा पशुओं को लेकर जारी
किए जाने वाले निर्देशों का पालन भी जिले में नहीं हो पा रहा है।
