Bribe: एफआईआर से एक नाम हटाने का एक लाख, दारोगा के रुपए लेते ही एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा
bribe: यूपी सरकार कितना भी भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात कर ले लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
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जिस वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की अलग अलग थानों और चौकियों का वसूली रेट सार्वजनिक हो चुकी है, उसी पुलिस की नई कारस्तानी सामने आई है।
यहां एफआईआर से नाम काटने और जोड़ने का खेल चल रहा है। मारपीट के मामले में दर्ज एफआईआर से एक नाम काटने के बदले एक लाख रुपए लिए जा रहे हैं।
ऐसे ही एक मामले में नाम हटाने के नाम पर एक लाख रुपए घूस लेते एंटी करप्शन की टीम ने एक दारोगा को पकड़ा है।
पकड़ा गया दारोगा अभिषेक वर्मा जंसा थाने की कस्बा चौकी में तैनात है।
गुरुवार को एंटी करप्शन टीम ने दारोगा को दीनदासपुर गांव से रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। टीम उसे लेकर रोहनिया थाना पहुंची है। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।
बेरुका गांव निवासी सैफ ने चार नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट, धमकाने सहित अन्य आरोपों में जंसा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
इस केस के विवेचक दारोगा अभिषेक वर्मा को बनाया गया था। केस में आरोपी अमजद ने दारोगा से अपना नाम हटाने की गुहार लगाई।
कहा कि वह बेगुनाह है। इस पर दारोगा ने नाम हटाने के लिए एक लाख रुपए की मांग की।
अमजद ने अपनी मजबूरियां बताईं और दारोगा को 10 हजार रुपए दिया। इसके बाद भी दारोगा एक लाख पर अड़ गया।
अमजद ने असमर्थता जताई तो दरोगा ने दबाव बनाया। इसके बाद अमजद ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की।
एंटी करप्शन की टीम ने दारोगा को रंगे हाथ पकड़ने के लिए योजना तैयार की।
केमिकल लगे नोट के साथ अमजद को दे दिया औऱ दरोगा को दीनदासपुर गांव में बुलाने के लिए कहा।
गुरुवार को गांव पहुंचे दारोगा ने जैसे ही अमजद से नोटों की गड्डी ली, एंटी करप्शन की टीम ने उसे दवोच लिया। मौके पर ही जरूरी कार्रवाई की गई।
इसके बाद दारोगा को रोहनिया थाने लेकर रवाना हो गई। माना जा रहा है कि उसे आज ही कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया जाएगा।
