Black magic के नाम पर महिलाओं की बलि देने वालों के ठिकाने पर जब पुलिस ने दी दस्तक, तब…
black magic: केरल के पथानामथिट्टा जिले में काला जादू के नाम पर दो महिलाओं की बलि देने के आरोपियों के
ठिकाने पर पुलिस ने दस्तक देकर वहां से जरूरी सबूत जुटाने का काम शुरू कर दिया।
स्निफर डॉग्स दस्ते के साथ मौका ए वारदात पर पहुंची पुलिस ने इस हौलनाक केस के कई
अहम सबूतों को सुरक्षित करते हुए उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है।
जल्दी अमीर बनने के लिए दो महिलाओं की बलि देने के बाद सदा जवान रहने के लिए
उनका मांस पकाकर चबाने वाले तीनों आरोपियों को पुलिस पहले ही पकड़ चुकी थी।
जैसा की मालूम ही है कि केरल के पथानामथिट्टा में एक तांत्रिक ने एक दंपत्ति के साथ मिलकर लॉटरी बेचने वाली दो
महिलाओं की मदद के नाम पर फुसलाते हुए अपहरण कर उनकी बलि दे दी थी।
मानव बलि के वीभत्स हत्या के मामले में जांच के लिए गठित की गई एसआईटी ने जांच के बाद
इस नृशंस हत्याकांड में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिमांड रिपोर्ट के अनुसार,
पति-पत्नी भगवल सिंह और लैला की जोड़ी ने मुख्य आरोपी मोहम्मद शफी के साथ मिलकर अपराध की साजिश रची थी।
आरोपियों की पुलिस रिमांड रिपोर्ट में यह जिक्र किया गया है कि चौंकाने वाली मानव बलि को पैसा कमाने के लिए
एक अनुष्ठान के हिस्से के रूप में पूरा किया गया था। पद्मा और रोसलिन के रूप में पहचानी गई
दो मृतक महिलाओं के शवों को बीते मंगलवार को भगवल सिंह और लैला के आवास के पास गड्ढों से निकाला गया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पीड़िता को पैसे का झांसा देकर लालच दिया था।
आरोपियों के बयान के बाद इसी जांच के सिलसिले में शनिवार को एसआईटी भगवल सिंह और
लैला के घर पहुंची थी। एसआईटी टीम के साथ विशेष रूप से प्रशिक्षित दो कुत्ते माया और मर्फी भी थे।
इन दोनों कुत्तों की सहायता से एसआईटी ने दोनों आरोपियों के घर से कई अहम सबूत इकट्ठे किए।
इससे पहले पूछताछ के दौरान भगवल सिंह ने कई अहम जानकारियां दी थीं।
पुलिस के मुताबिक आरोपी भगवल सिंह खुद को वैद्य बताता था। इसके अलावा वह कई तरह के सामाजिक कार्यों में भी शामिल होता था।
इस मामले में एक ओर जहां एसआईटी अपनी जांच में जुटी है।
तो दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी सख्त रुख अपनाते हुए
केरल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है।
इस नोटिस में एनएचआरसी ने दोनों अधिकारियों से जांच की स्थिति और पीड़ितों के परिवारों को भुगतान किए गए
मुआवजे सहित 4 सप्ताह के भीतर इस मामले में एक रिपोर्ट मांगी है।
