Home Loan : त्योहारों के मौसम में होम लोन लेने का बना रहे प्लान, देने होंगे ये चार्जेस, इनके बारे में अच्छे से जान लें
Home Loan : घर खरीदना जिंदगी का एक बड़ा सपना और खास पल होता है.
कई लोग त्योहारों के मौसम में अपना घर खरीदना चाहते हैं क्योंकि भारत में इन दिनों में खरीदी शुभ मानी जाती है.
होम लोन लेते समय कई लोग ब्याज दरों की तुलना और काफी रिसर्च करते हैं.
लेकिन ध्यान रहे कि ब्याज दरों और अन्य हिड्डेन चार्जेस को अनदेखा न करें जो लोन पर लागू हो सकते हैं.
दरअसल होम लोन पर लगने वाले हिड्डेन चार्जेस वास्तविक लोन पेमेंट में भारी
अंतर और असर डाल सकते हैं. आइये हम जानते है कि ये कौन-से शुल्क हैं.
प्रोसेसिंग फीस
होम लोन अप्रूव होने से पहले क्रेडिट अंडरराइटिंग प्रोसेस के दौरान लोन एप्लीकेशन का मूल्यांकन किया जाता है.
इसमें KYC वेरीफिकेशन, फाइनेंशियल असेसमेंट, एंप्लॉयमेंट वेरिफिकेशन,
घर और ऑफिस के पते का सत्यापन, क्रेडिट हिस्ट्री का मूल्यांकन जैसी बातें शामिल होती हैं.
इसलिए लोन देने वाली बैंक या एनबीएफसी प्रोसेसिंग फीस के के जरिए
क्रेडिट अंडरराइटिंग प्रोसेस से जुड़े खर्च वसूलती है. सामान्य तौर पर कुल लोन
अमाउंट का 2% तक का वेरिएबल प्रोसेसिंग फीस के तौर पर लिया जाता है.
एडमिनिस्ट्रेशन चार्जेस
लोन डिर्सबसमेंट से पहले लैंडर को संपत्ति को गिरवी रखने पर उसके मूल्य और उपयुक्तता का आकलन करने के लिए
कानूनी मूल्यांकन करना होता है. कुछ बैंक कानूनी राय के लिए और संपत्ति के मूल्यांकन के लिए
अलग से शुल्क ले सकते हैं, इसे एडमिनिस्ट्रेशन चार्जेस कहते हैं.
आमतौर पर यह प्रॉपर्टी की कीमत के 0.2% से 0.5% तक भिन्न होता है.
होमलोन(Home Loan) पर जीएसटी चार्ज
ग्राहक को सीधे लोन राशि पर जीएसटी का भुगतान नहीं करना होता है, लेकिन जीएसटी उन शुल्कों पर लागू होता है
जो आप होम लोन पर बैंकों को देते हैं. उदाहरण के लिए, अगर प्रोसेसिंग फीस 5,000 रुपये है,
तो आपको उस पर 18% जीएसटी देना होगा, यानी बैंक को अतिरिक्त 900 रुपये.
बैंक को दिया जाने वाला कुल प्रोसेसिंग शुल्क 5900 रुपये होगा, जिसमें जीएसटी भी शामिल है.
होम लोन(Home Loan) डॉक्यूमेंटशन के लिए शुल्क
जब आप होम लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक को कई दस्तावेजों को सुरक्षित रूप से बनाए रखना और प्रबंधित
करना होता है. इसलिए, वे आपके दस्तावेज़ों को अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखने के लिए डॉक्यूमेंटेशन चार्ज लगाते हैं.
लीगल चार्ज
ग्राहक को लोन देने वाले बैंक के लिए यह सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण होता है
कि जिस प्रॉपर्टी पर वे लोन दे रहे हैं, उसमें कोई कानूनी विवाद तो नहीं है.
यह सुनिश्चित करने के लिए बैंक लीगल एक्सपर्ट की मदद लेते हैं जो सभी कानूनी पहलुओं की जांच करते हैं.
इस जांच में प्रॉपर्टी ओनरशिप हिस्ट्री, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट शामिल होते हैं.
जांच के बाद एक्सपर्ट बैंक को अपनी अंतिम राय देते हैं कि वे उक्त ग्राहक को लोन दें या नहीं.
