दूसरे महावत को नहीं भाया गजराज, बेकाबू होकर मचाया उत्पात
Elephant: बिजनौर कालागढ़ स्थित हाथीशाला से चारा-पत्ती के लिए निकला पालतू हाथी ‘गजराज’ अचानक बेकाबू हो गया। निजी महावत के छुट्टी पर जाने के बाद दूसरे महावत द्वारा हाथी को ले जाने के दौरान यह घटना हुई। हाथी ने कई वाहनों पर हमला करने का प्रयास किया और जमकर उत्पात मचाया। हालात बिगड़ते देख वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर हाथी को घेर लिया। घंटों की मशक्कत के बाद वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी की टीम ने हाथी को ट्रैंकुलाइज कर काबू में किया और वापस हाथीशाला पहुंचाया।
जानकारी के मुताबिक, रविवार को वनकर्मी पालतू हाथी गजराज को चारा-पत्ती के लिए कालागढ़ स्थित हाथीशाला से बाहर लेकर निकले थे। हाथी करीब 200 कदम ही चला था कि हनुमान मंदिर के पास अचानक विचलित हो गया। इसके बाद उसने बेकाबू होकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही रेंजर नंद किशोर रुवाली समेत दर्जनों वनकर्मी मौके पर पहुंच गए। वनकर्मियों ने हाथी को नियंत्रित करने के तमाम प्रयास किए, लेकिन वह काबू में नहीं आया। इस दौरान एक सहमा हुआ वनकर्मी हाथी के ऊपर बैठा रहा, जबकि आसपास मौजूद लोगों की सांसें अटकी रहीं।
कई वाहनों पर हमला करने की कोशिश
बेकाबू हाथी ने कई वाहनों की ओर हमला करने का प्रयास किया। हालांकि वनकर्मियों की सतर्कता के चलते कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। उत्पात मचाता हुआ हाथी पक्का मार्केट स्थित मैदान में पहुंच गया। वनकर्मियों ने मौके की गंभीरता को देखते हुए हाथी को मैदान में ही चारों ओर से घेरकर नाकेबंदी कर दी।
इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी दुष्यंत शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद चिकित्सकीय टीम ने हाथी को ट्रैंकुलाइज किया, जिसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से काबू में लेकर हाथीशाला पहुंचाया गया।
दूसरे महावत को देखकर विचलित हुआ हाथी
कालागढ़ कार्बेट टाइगर रिजर्व के रेंजर नंद किशोर रुवाली ने बताया कि हाथी गजराज का निजी महावत डबले छुट्टी पर गया था। उसके स्थान पर दूसरे महावत ओमपाल को हाथी की जिम्मेदारी दी गई थी। ओमपाल कुछ दूर तक हाथी के साथ पैदल चला और बाद में उसके ऊपर बैठ गया। इसी दौरान हाथी को अपने ऊपर दूसरे महावत के बैठे होने का आभास हुआ और वह अचानक विचलित होकर बेकाबू हो गया।
रेंजर के अनुसार, हाथी बेहद संवेदनशील और अपने महावत के प्रति काफी लगाव रखने वाला जानवर होता है। वह अपने निजी महावत के अलावा किसी दूसरे महावत को आसानी से स्वीकार नहीं करता। इसी वजह से गजराज दूसरे महावत के साथ असहज होकर उग्र हो गया।
