RBI का बड़ा फैसला जल्द, आम जनता को मिल सकती है ब्याज दरों में राहत
RBI: जीएसटी दरों में हालिया कटौती के बाद अब आम जनता को एक और बड़ी राहत मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में सरप्राइज रेट कट का फैसला ले सकता है।
यदि ऐसा होता है, तो होम लोन, कार लोन और अन्य ईएमआई पर बोझ घट सकता है, जिससे आम आदमी की जेब पर राहत मिलेगी।
RBI की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 1 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। अधिकांश विश्लेषकों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक अपनी प्रमुख नीति दर रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रख सकता है।
लेकिन वैश्विक व्यापारिक दबाव, कमजोर निवेश, और नियंत्रित महंगाई दर को देखते हुए रेट कट की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
रेट कट की बढ़ती संभावनाएं
रॉयटर्स के एक पोल में करीब तीन-चौथाई अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि RBI फिलहाल दरों में बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, सिटी, बार्कलेज, कैपिटल इकॉनॉमिक्स और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जैसी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं ने संकेत दिए हैं कि RBI एक “इंश्योरेंस रेट कट” का विकल्प चुन सकता है, ताकि बाहरी आर्थिक झटकों से देश की अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 की शुरुआत से अब तक RBI ने 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है, बावजूद इसके निजी निवेश में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है।
अगस्त 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में RBI ने नीति दरों को यथावत रखते हुए ‘न्यूट्रल स्टांस’ बनाए रखा था, लेकिन तब से वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां और भी अधिक सख्त हो गई हैं।
आर्थिक माहौल और सरकार की तैयारी
भारत ने जून तिमाही में 7.8% की जीडीपी ग्रोथ दर्ज की, जो अनुमान से अधिक थी। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह आंकड़ा मुद्रास्फीति के समायोजन के बाद उतना मजबूत नहीं दिखता जितना प्रतीत होता है।
इसके साथ ही, अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ और वीजा शुल्क में वृद्धि के चलते भारत के सेवा क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है, जिससे व्यापारिक माहौल अनिश्चित हो गया है।
सरकार की ओर से हाल ही में आयकर राहत और जीएसटी दरों में कटौती जैसे कदम उठाए गए हैं, ताकि घरेलू मांग को प्रोत्साहित किया जा सके।
इन परिस्थितियों में, RBI द्वारा मौद्रिक नीति में लचीलापन दिखाना आम जनता और उद्योग दोनों के लिए राहतकारी हो सकता है।
आगे क्या?
कैपिटल इकॉनॉमिक्स ने संकेत दिया है कि RBI अक्टूबर की बैठक में दरों में कटौती कर सकता है, और दिसंबर में एक और कटौती संभव हो सकती है।
संस्था के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ का भारत की जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जबकि महंगाई अभी भी नियंत्रित दायरे में है — जो नीतिगत कटौती के पक्ष में माहौल बना रहा है।
अब सबकी निगाहें 1 अक्टूबर को होने वाली अंतिम घोषणा पर टिकी हैं। यदि RBI रेट कट करता है, तो यह न सिर्फ लोन की दरों को प्रभावित करेगा, बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत हो सकता है।
