प्रशासन की अनदेखी से नौतार बांध बना खतरा, फाटक न होने से गांवों में बाढ़ का डर
छितौनी बांध से निकले नौतार बांध पर 2 करोड़ 20 लाख की लागत से बना पुल अधूरा पड़ा है। पुल पर फाटक न लगने से खड्डा तहसील के दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
बाढ़ खंड और स्थानीय प्रशासन इस मामले में उदासीन बना हुआ है। नौतार बांध के पास नौतार गांव के समीप मदनपुर ड्रेन का पानी, जो नेपाल के सूरज पुरवा और मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के बीच से आता है,
साइफन के जरिए नारायणी नदी में जाता था पानी
साइफन के जरिए नारायणी नदी में जाता था। इससे सिसवा गोपाल, सारंग छपरा, सोहरौना, पकड़ी बृजलाल, लक्ष्मीपुर, भगवानपुर, शाहपुर, रंजीता, नौतार जंगल, बसडीला जैसे गांव बाढ़ से बचे रहते थे।
पहले, जब नदी का जलस्तर बढ़ता था, तो साइफन और बांध पानी को रोक लेते थे। लेकिन साइफन खराब होने और नदी के पानी खींचने की प्रक्रिया बंद होने से नौतार जंगल, रंजीता, शाहपुर और बसडीला में बाढ़ का पानी भरने लगा।
ग्रामीणों ने पानी निकालने के लिए बांध काट दिया, जिससे हर साल सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। इसे देखते हुए बाढ़ खंड ने नौतार बांध पर बड़ा पुल बनवाया, लेकिन मार्च 2025 में पुल बनने के बावजूद फाटक नहीं लगाया गया।
नारायणी नदी में पानी बढ़ना शुरू हो चुका है। अगर वाल्मीकि नगर बैराज से 5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया, तो भगवानपुर, नौतार जंगल, रंजीता, शाहपुर, तुर्कहा, पकड़ी, सोहरौना, सारंग छपरा, सिसवा गोपाल और मदनपुर में बाढ़ का पानी पहुंचेगा।
इससे सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद होगी, जो राष्ट्रीय नुकसान होगा। बाढ़ खंड और जिला प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहे।
बाढ़ खंड के एसडीओ मनोरंजन कुमार का कहना है कि नदी का पानी गांवों तक नहीं पहुंचेगा और थोड़ा-बहुत पानी आएगा तो गांव नहीं डूबेंगे। उन्होंने बताया कि फाटक का टेंडर अलग से नहीं हुआ था और इसकी प्रक्रिया चल रही है। टेंडर होने के बाद फाटक लगाया जाएगा।
