Makar Sankranti:परम्परागत रिति रिवाजों एवं आस्था के साथ श्रद्धा पूर्वक मनाया गया मकर संक्रांति का पर्व
Makar Sankranti: ( कम्प्यूटर जगत ) कुशीनगर के स्थानीय उपनगरों सहित आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों में मकर संक्रांति का पर्व परम्परागत रिति रिवाजों एवं आस्था के साथ श्रद्धा पूर्वक मनाया गया।
इस दौरान लोग आपसी मेल मिलाप के साथ साथ सोशल मीडिया के माध्यम से एक दूसरे को पर्व की शुभकामना संदेश भेजे गये।
वही युवा वर्ग द्वारा पर्व का उत्साह खुले आसमान में पतंगों को उड़ा पर्व की खुशियां मनायी गई।
कुशीनगर व आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों में मकर संक्रांति का पर्व परम्परागत रिति रिवाज के आस्था व श्रद्धा पूर्वक मनाया गया।
वैसे तो भारत में अलग अलग क्षेत्रों में मकर संक्रांति का पर्व अलग अलग रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है
और लोहड़ी पर्व मनाया जाता है। वही असम में बिहू के रूप में इस पर्व का उल्लास मनाया जाता है।
अलग अलग मान्यताओं के अनुसार
इस पर्व में पकवान भी अलग अलग होते है लेकिन दाल और चावल की खिचड़ी इस पर्व की प्रमुख पहचान बन चुकी है।
विशेष रूप से गुड और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है। इसके अलावे तिल और गुड़ का भी मकर संक्रान्ति पर बेहद महत्व है।
तिल और गुड के लडडु एवं अन्य व्यंजन भी बनाये जाते है। इस समय सुहागन महिलाएं सुहाग की सामग्री का आदान प्रदान भी करती है।
ऐसा माना जाता है कि इससे उनके पति की आयु दीर्घायु होती है। सूर्य के उत्तरायण होने पर खरमास भी समाप्त हो जाएगा और सारे मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
पूजा-पाठ का विशेष महत्व
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करके भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जीवन में हर तरह कष्टों से मुक्ति मिल जाती है
और जीवन में सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस पर्व की खासियत यह है कि यह पूरे भारत वर्ष में अलग-अलग नाम से जाना जाता है।
