Stumble: पहली ही बरसात सिंचाई विभाग की खुली पोल,ठोकर का आठ मिटर हिस्सा धंसा
Stumble: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में नारायणी नदी की बाढ़ से बचाने के लिए सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये बाढ़ खण्ड विभाग को देती है।
लेकिन अमवा तटबंध के रामपुर बरहन के परोरही गांव के सामने बना ठोकर नंबर-चार का आठ मीटर हिस्सा पहली बरसात में ही धंस गया।
विभाग में अधिशासी अभियंता एक्सईएन, सहायक अभियंता (एई) और जूनियर इंजीनियर को लगाकर ठेकेदार के माध्यम से बांधा और नोज (ठोकर) बनवाती है।
सभी जिम्मेदार अधिकारी उसकी निरन्तर मॉनिटरिंग कर उसके निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं।
विभाग के जिम्मेदार की लापरवाही और ठेकेदारों की रही मनमानी
लेकिन विभाग के जिम्मेदार की लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी के कारण सरकार के धन खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को बाढ़ का का खतरा सता रहा।
क्योंकि विभाग द्वारा बनाए गए करोड़ों रुपए के लागत वाले ठोकर की पहली और हल्की बारिश में ही धसान शुरू हो गई।
जिम्मेदार अधिकारियों को जब यह समस्या बताई गई तो इसे सामान्य समस्या बताकर नोज धंसने की बात से ही इनकार किया।
अमवा तटबंध के रामपुर बरहन के परोरही गांव के सामने बना ठोकर नंबर-चार का आठ मीटर हिस्सा पहली बरसात में ही धंस गया।
इसके चलते बांध पर खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ठोकर की मरम्मत नहीं कराई गई तो मानसून के समय नदी के बढ़ते जलस्तर में बांध को नुकसान पहुंच सकता है।
गांव के सामने बड़ी गंडक नदी बंधे से काफी नजदीक बह रही
वहीं, विभागीय जिम्मेदार बांध को सुरक्षित किए जाने का दावा कर रहे हैं। अमवाखास तटबंध के परोरही गांव के सामने बड़ी गंडक नदी बंधे से काफी नजदीक बह रही है।
बंधे को बचाने और पानी की धारा को दूसरी दिशा में मोड़ने के लिए ठोकर नंबर-चार बनाया गया है।
नदी में जलस्तर की वृद्धि होने के बाद सोमवार को हल्की बारिश में ठोकर का आठ मीटर हिस्सा धंस गया।
ठोकर धंसने के बाद नदी का दबाव अब मुख्य तटबंध पर बढ़ गया है। ठोकर का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त होते ही नदी बांध के करीब से सटकर बह रही है।
स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना बाढ़ खंड विभाग को दे दी है। बावजूद इसके देर शाम तक विभागीय जिम्मेदार मौके पर पहुंच ही नहीं सके।
गांव के राजकुमार पाल, शुभनारायन, अशोक यादव, अर्जुन, रामक्षत्रिय यादव, सतेंद्र यादव आदि का कहना है कि नदी बंधे की काफी नजदीक से होकर बह रही है।
मुख्य बांध पर संकट मंडराने लगा है। यही हाल रहा तो बढ़ते जलस्तर में बांध को भी नदी नुकसान पहुंचा सकती है। बंधा टूटने के बाद कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।
