Tajmahal: क्या ताजमहल के 22 कमरों में छुपा है तेजोमहालय का रहस्य.. ? 

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Tajmahal: क्या ताजमहल के 22 कमरों में छुपा है तेजोमहालय का रहस्य.. ? 

Tajmahal: हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक याचिका दायर कर भारतीय

पुरातत्व सर्वेक्षण को ताजमहल के 22 बंद कमरों की जांच करने का निर्देश देने की मांग की गई है

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ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं हिन्दू देवताओं की मूर्तियों तो नहीं हैं।

इसी याचिका के चलते विवाद हो चला है। इतिहासकारों के अनुसार

वर्ष 1934 में इन 22 कमरों को खोले जाने की बात कई जाती है।

कहा जा रहा है कि यदि ताजमहल के 22 कमरे अब खुलते हैं

तो नए रहस्य जरूर सामने आएंगे। आओ जानते हैं इन 22 कमरों का रहस्य।

1. इतिहासकार पुरुषोत्तम ओक ने अपनी किताब में लिखा है कि ताजमहल के हिन्दू मंदिर होने के

700 से अधिक सबूत मौजूद हैं। ताजमहल को पहले ‘तेजो महालय’ कहते थे।

वर्तमन ताजमहल पर ऐसे 700 चिन्ह खोजे गए हैं जो इस बात को दर्शाते हैं

कि इसका रिकंस्ट्रक्शन किया गया है। यह महल राजा मानसिंह का था।

ताजमहल (Tajmahal) का निर्माण राजा परमर्दिदेव के शासनकाल में

1155 अश्विन शुक्ल पंचमी, रविवार को हुआ था। यह तीन गुंबदों वाला महल था।

ध्वंस और रिकंस्ट्रक्शन के बाद यह एक गुंबद वाला ही रह गया है।

2. शिव मंदिर में एक मंजिल के ऊपर एक और मंजिल में दो शिवलिंग स्थापित करने का हिन्दुओं

में रिवाज था, जैसा कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर और सोमनाथ मंदिर में देखा जा सकता है।

ताजमहल में एक कब्र तहखाने में और एक कब्र उसके ऊपर की मंजिल के कक्ष में है

तथा दोनों ही कब्रों को मुमताज का बताया जाता है।

3. ताजमहल एक सात मंजिला भवन है। शहजादे औरंगजेब के शाहजहां को लिखे पत्र में भी

इस बात का विवरण है। भवन की चार मंजिलें संगमरमर पत्थरों से बनी हैं

जिनमें चबूतरा, चबूतरे के ऊपर विशाल वृत्तीय मुख्य कक्ष और तहखाने का कक्ष शामिल है।

मध्य में दो मंजिलें और हैं जिनमें 12 से 15 विशाल कक्ष हैं।

संगमरमर की इन चार मंजिलों के नीचे लाल पत्थरों से बनी दो और मंजिलें हैं,

जो कि पिछवाड़े में नदी तट तक चली जाती हैं। सातवीं मंजिल अवश्य ही

नदी तट से लगी भूमि के नीचे होनी चाहिए, क्योंकि सभी

प्राचीन हिन्दू भवनों में भूमिगत मंजिल हुआ करती है।

4. नदी तट के भाग में संगमरमर की नींव के ठीक नीचे लाल पत्थरों वाले 22 कमरे हैं

जिनके झरोखों को शाहजहां ने चुनवा दिया है। इन कमरों को,

जिन्हें कि शाहजहां ने अतिगोपनीय बना दिया है, भारत के पुरातत्व विभाग द्वारा तालों में बंद

रखा जाता है। सामान्य दर्शनार्थियों को इनके विषय में अंधेरे में रखा जाता रहा है।

इन 22 कमरों की दीवारों तथा भीतरी छतों पर अभी भी प्राचीन हिन्दू चित्रकारी अंकित हैं।

इन कमरों से लगा हुआ लगभग 33 फुट लंबा गलियारा है।

गलियारे के दोनों सिरों में एक-एक दरवाजे बने हुए हैं।

इन दोनों दरवाजों को इस प्रकार से आकर्षक रूप से ईंटों और

गारे से चुनवा दिया गया है कि वे दीवार जैसे प्रतीत हों।

5. स्पष्टत: मूल रूप से शाहजहां द्वारा चुनवाए गए इन दरवाजों को कई बार खुलवाया और फिर से

चुनवाया गया है। कहते हैं कि सन् 1934 में दिल्ली के एक निवासी ने चुनवाए हुए दरवाजे के

ऊपर पड़ी एक दरार से झांककर देखा था। उसके भीतर एक वृहत कक्ष (huge hall) और वहां के

दृश्य को‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍ देखकर वह हक्का-बक्का रह गया तथा भयभीत-सा हो गया।

वहां बीचोबीच भगवान शिव का चित्र था जिसका सिर कटा हुआ था और उसके चारों ओर बहुत

सारी मूर्तियों का जमावड़ा था। ऐसा भी हो सकता है कि वहां पर संस्कृत के शिलालेख भी हों।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि ताजमहल हिन्दू चित्र, संस्कृत शिलालेख, धार्मिक लेख, सिक्के तथा

अन्य उपयोगी वस्तुओं जैसे कौन-कौन-से साक्ष्य छुपे हुए हैं, उसकी सातों मंजिलों को खोलकर

साफ-सफाई कराने की नितांत आवश्यकता की मांग की जा रही है।

6. फ्रांसीसी यात्री बेर्नियर ने लिखा है कि ताज के निचले रहस्यमय कक्षों में गैर मुस्लिमों को जाने की

इजाजत नहीं थी, क्योंकि वहां चौंधिया देने वाली वस्तुएं थीं। यदि वे वस्तुएं शाहजहां ने खुद ही

रखवाई होती तो वह जनता के सामने उनका प्रदर्शन गौरव के साथ करता,

परंतु वे तो लूटी हुई वस्तुएं थीं और शाहजहां उन्हें अपने खजाने में ले जाना चाहता था

इसीलिए वह नहीं चाहता था कि कोई उन्हें देखे। नदी के पिछवाड़े में हिन्दू बस्तियां, बहुत से हिन्दू

प्राचीन घाट और प्राचीन हिन्दू शवदाह गृह हैं। यदि शाहजहां ने ताज को

बनवाया होता तो इन सबको नष्ट कर दिया गया होता।

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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