CBI का नया खुलासा:सामने आया यूपी के भ्रष्टाचारी अफसर का दुस्साहस, बैंक खातों में मंगवाता था घूस की रकम
cbi:आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसे ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी की जांच के दौरान
सीबीआई (cbi) ने खुलासा किया है कि अमित श्रीवास्तव घूस की रकम भी बैंक खातों में मंगवाता था।
बैंक खातों की जांच यह सामने आया है। अमित ने भ्रष्टाचार की कमाई भी बैंकों में रखी।
महज 27 महीने में अमित ने न केवल अपने बल्कि पत्नी के खाते में भी लाखों रुपये जमा किए।
रफ्तार इतनी तेज थी इस दौरान अमित के खाते में 500 गुना और उसकी पत्नी के खाते में 250 गुना पैसा आ गया।
अमित का सर्वोदय नगर स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में खाता है जबकि पत्नी पारुल का खाता भी इसी बैंक में है।
एक जनवरी 2020 को अमित के बैंक खाते में केवल 9783 रुपये थे। पारुल के खाते में 11,375 रुपये जमा थे।
27 महीने बाद 25 अप्रैल 2022 को अमित के खाते में 43.61 लाख से भी
ज्यादा रकम जमा थी।पारुल के अकाउंट में 25.50 लाख से भी ज्यादा आ गए।
सीबीआई (cbi) ने अमित के सैलरी स्टेटमेंट सहित आय के अन्य साधनों को जुटाया तो सारी हकीकत सामने आ गई।
इन 27 महीनों में अमित का कुल वेतन 17.82 लाख रुपये आया। बैंक में जमा रकम पर ब्याज 1.09 लाख मिला।
पत्नी के बैंक खाते में जमा रकम पर ब्याज 57 हजार रुपये मिला।
इस अवधि में अमित ने 6.55 लाख रुपये खर्च किए। इन सबकी कटौती के बाद अतिरिक्त
58 लाख रुपये कहां से आए, इसका जवाब जांच अधिकारी को नहीं मिल सका है।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि चूंकि पीएफ के मामले पूरे प्रदेश से आते थे।
केस फाइनल करने से पहले पूरा भुगतान ले लिया जाता था। कई बार अंशधारक नहीं आ पाते थे
तो उनसे रिश्वत का पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिया जाता था।
ईपीएफओ के प्रवर्तन विभाग की कुंडली खंगालेगी सीबीआई
जेल में बंद ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी अमित श्रीवास्तव के पास आय से अधिक संपत्ति के खुलासे के बाद
सीबीआई (cbi) ने प्रवर्तन विभाग की कुंडली खंगालने की तैयारी शुरू कर दी है।
अमित से पहले की गई पूछताछ की फाइलें भी खोल दी गई हैं। खुलासे के बाद ईपीएफओ में हड़कम्प मच गया है।
एफआईआर में केंद्रीय जांच एजेंसी ने आरोपित के पास कुल संपत्ति का ब्योरा दर्ज कर दिया है।
उसी कड़ी में सीबीआई ने स्वर्ण जयंती विहार स्थित प्लॉट के कागजात भी कब्जे में लेने की तैयारी की है।
बैंकों में अमित की जमा धनराशि की निकासी पर रोक लगाने के लिए बैंकों को नोटिस दिया जाएगा।
सीबीआई (cbi) की अनुमति के बगैर प्रवर्तन अधिकारी के खातों से एक भी पैसा नहीं निकाला जा सकेगा।
जांच के दौरान पूरे नेटवर्क के तार खंगाले जाएंगे। एफआईआर और साक्ष्यों को अमित के वाद के साथ
जोड़ दिया गया है। सीबीआई टीम कभी भी कानपुर आकर प्रवर्तन अधिकारी के नेटवर्क को तलाशेगी।
इस बीच ईपीएफओ में सारे विभागों में किसी को भी कोई जानकारी देने पर रोक लगा दी गई है।
